का प्रमाद फिर से न दोहराया जाए, इसलिए मुझे स्टेशन पर उस जन-समुदाय में से पैदल ले जाने की बजाय स्वतंत्र मोटर में ले जाया गया।

इस तरह जब-जब मुझे स्वतंत्र मोटर से विशेष व्यवस्था के साथ कहीं ले जाया जाता तब-तब बंदियों में मेरे संबंध में बड़प्पन की धारणा होती,‘वह क्या, वह तो भैया, राजा है राजा! देखो उसे मोटर दी गई। वह हमारे साथ पैर घसीटते पैदल थोड़े ही आएगा!’ कोई कहता, ‘सरकार उससे डरती है। देखो, कैसे मोटरकार ला दी।’ मार्सेलिस के जहाज से भागने के प्रयासों के जो लाभ हुए उनमें से यह भी एक लाभ हुआ कि मोटर की खूब सैर हो गई और उससे बंदियों में मेरे संबंध में जो सकारण-अकारण आदरभाव था और जिसके लिए सरकारी अधिकारी डटकर प्रयत्नशील थे कि वह आदरभाव न बने, बढ़ता ही चला गया।

स्टेशन पर आते ही मुझे एक स्वतंत्र डिब्बे में


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सकता है, बाल को पत्र लिखने का यह अंतिम अवसर ही हो। मैंने उस वाॅर्डर को संकेत किया। वह दबे कदम आ गया। परंतु यह कहते हुए कि रात में देखा जाएगा, वह चलता बना। आधी नींद पूरी हो चुकी होगी। दरवाजे के सीखचों के पास धीमी खड़खड़ाहट सुनाई दी। मेरे कान खड़े हो गए, मैं चैंकते हुए उठ गया। देखा तो वाॅर्डर दरवाजा खड़खड़ा रहा था। उसने हाथ से संकेत किया ‘लिखिए’ और लालटेन समीप ले आया। मुझसे एक शब्द भी बोलते हुए यदि वह पकड़ा जाता तो उसे दंड


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