से यदि मुझ अकेले को ही दंड भुगतना पड़ता तो मेरे मन को उन वेदनाओं का, जो मैंने भुगती है, पचासवां हिस्सा ही भोगना नहीं पड़ता। परंतु एक तो मैं अपनी वेदनाएं सहता था और उसी समय यदि मेरी आंखों के सामने मेरे अग्रज को भी, जो मुझे भगवान् सदृश पूज्य है, मुझसे भी अधिक यंत्रनाएं झेलते हुए मुझे देखना पड़ता, सुनना पड़ता तो उस समय मेरी सहनशक्ति ऐसी भरभराती जैसे तूफान में
कोई प्रचंड वटवृक्ष कड़कड़ करता भरभराकर धाराशायी हो जाता है। मेरा कलेजा छलनी हो जाता।
एक विश्वासी अधिकारी से पूछा ‘‘यहां उन्हें कोई कष्ट तो नहीं दिया गया था?’’ उसने कहा, ‘‘वैसे तो नहीं हुआ, पर आपके अभियोगी (अभियोग में जो सह अभियुक्त होते हैं, उन्हें कारागृह में ‘को-एक्यूज्ड’ कहा जाता है) कहा करते।’’ उनका यह आश्वासन सुनकर थोड़ी राहत मिली। कम-से-कम इस कमरे में तो वे चैन
जाऊंगा, तब उसके कोमल मन की कैसी अवस्था होगी? और मुक्ति के पश्चात् वह कहां जाएगा? उसे कौन सहारा देगा? कौन उसकी शिक्षा पूरा कराएगा? यह नन्हा बालक जिस किसी द्वार पर पहुंचेगा, उसके द्वार उसी के सामने धड़ाधड़ बंद कर दिए जाएंगे। दुःखावेग में ये सारे विचार एक साथ तरंगित होकर पुनः डूब गए। उनमें कुछ विचार पुनः ह्नदय में उथल पुथल मचाते रहे।
दादा, यह लिजिए
वही वाॅर्डर फिर पास आया। काफी अंधेरा हो गया था।
‘‘दादा!’’
‘‘हां।’’
‘‘यह