लो, चिल्लाओ, बात करो, पर आपस में धीमी आवाज में और किसी प्रकार ठाणे के इस कारागृह से भाग न जाएं, यह सावधानी रखते हुए। पुलिस अफसरों को उतने ही बंदी गिन दिए, जितने लिए थे तब समझो गंगा नहा गए, और इस तरह नाक में दम होने पर निढाल हो जाते। कर्तव्य-कर्म वही है कि जिसकी प्रशंसा जिस समाज में हम रहते हैं, उसका बहुजन समाज करता है। यह साधारण सहज भावना है। इस विधान का पोषक उदाहरण


इस चालान के संस्थागत अभिमान से कुछ परे ढूंढ़ना आवश्यक नहीं है। जिस समाज में बीभत्स विनोद कर्तव्य सिद्व होता है, उस समाज में वह व्यक्ति पापी तथा समाज-निंदित सिद्व होगा ही, जो इस तरह के विनोद में सम्मिलित नहीं होता। होली के त्योहार में जो गोबर से नहीं खेलता, वही अशिष्ट सिद्व होता है और समाज उसकी ओर उपहास तथा तिरस्कार बुद्वि से देखता है।

बालिस्टर की प्रतिष्ठा


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पर, जिसमें मुझे रखा गया था, दुष्ट-से-दुष्ट और क्रूरता में विख्यात मुस्लिम वाॅर्डर नियुक्त किये गए थे। पूरा कठोर एकांत। भोजन आ गया। एक कौर भी गले से उतरना असंभव प्रतीत हो रहा था। बाजरे की घटिया रोटी और जाने कौन सी बहुत खट्टी भाजी, जिसे मुंह में भी नहीं डाला गया। रोटी का टुकड़ा तोड़ना, थोड़ा चबाना, उस पर घूंट भर पानी पीना और उसके साथ गटक जाना- इस तरह रोटी खाई। जल्दी ही शाम हो गई। कोठरी बंद करके लोगों के जाते ही निढाल होकर मैं बिस्तर पर लुढ़क


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