इतने नहीं भरते थे, वे भी खचाखच भरे रहते थे और मधुशालाएं, क्रीड़ालय सतत नाच-गानांे, हंसी-कहकहों से गूंजते रहते थे।
उन्मुक्त हास्य
पिछले महायुद्व में भी यही अनुभव हुआ। जर्मन पनडुब्बियों के अधिकारियों तथा नाविकों को युद्व में सभी सैनिकों से अधिक कष्टप्रद तथा मारक सेवा करनी पड़ी। उन्हें तत्काल अपने प्राण हथेली पर लेकर सागर में गोते लगाने पड़ते और समुद्र के गर्भ में पल-पल मृत्यु की अपेक्षा करते मारने का काम करना पड़ता। उस भयप्रद अनिश्चित के धूम-धड़ाके में कभी-कभी ये पनडुब्बियां किसी तटीय शहर में आकर विश्राम
करतीं, तब उतने से अल्प काल में भोग-विलास के लिए जो विहारालय बनाए गए थे, उनमें से कई में यह ध्येय वाक्य होता-‘एन्जाॅय टिल दाउ गोएस्ट मैड! एन्जाॅय फाॅर टुमारों वी डाय!!’ (हंसो बेटा, इतना हंसो कि उन्माद हो जाए, क्यांेकि कल तुम्हें कराल काल का ग्रास जो
का अर्थ मनुष्य के जीवन के कर्तृव्य के सामान्य काल से किया जाता है। इंग्लैंड आदि देशों में यह अवधि चैदह वर्ष की है, हिंदुस्थान में वे अपराध के हिसाब से बीस अथवा पच्चीस वर्ष मान सकते हैं। यह अवधि ही दंडविज्ञान में जीवन काल है। अधिक-से-अधिक दंड की यही अवधि है। अतः मुझे प्राप्त दो आजन्म कारावास यदि एककालिक नहीं किए गए और एक आजन्म कारावास काटने के उपरांत दूसरा आजन्म कारावास काटने का अर्थ लिया गया, तो दंडविज्ञान की भाषा में ही इस जन्म की समाप्ति के पश्चात् यह