अतः जब तक संपूर्ण तथा सुसंगत कथन प्रसिद्व नहीं होता, पाठक हमारे अंदमान स्थित जीवन के बारे में कुछ भी साधारण धारणा न बनाएं। यद्यापि इन संस्मरणों में सारी बातें कहना संभव नहीं है, फिर भी जो कुछ बताया जाएगा उसे अक्षरशः तथा भावार्थशः यथातथ्य बताने का यत्न अवश्य किया जाएगा। इस ग्रंथ में विचारों, भावनाओं तथा घटनाओं का जो वर्णन आएगा, वह सब उस समय उद्भूत विचार-भावनाओं का निदर्शक होगा और आज उसे मात्र ऐतिहासिक रूप में ही पढ़ा जाए, ऐसी लेखक की इच्छा है।

- वि. दा. सावरकर


पूर्वार्ध


प्रकरण -1

बंबई स्थित डोंगरी का कारागृह

“आप पर पचास वर्ष के दंड काले पानी का दंड लागू हो गया है हेग¹ के अंतर्राश्ट्रीय न्यायलय ने कहा है कि ’अंगे्रजों को आपको फ्रांस के हाथों सौंपना ही चाहि,ए था।’ ऐसा कठोर निर्णय नहीं दिया जा सकता है।’’ मुझे ं ं ं ं ं ं ंने कहा।


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से उसका महत्व तो कम नहीं होगा अथवा उसकी तीव्रता कम नहीं होगी, अथवा इस विश्व की विराट् दिनचर्या में वह सब अनसुना रहने के कारण कोई बड़ी रूकावट आनेवाली है, ऐसा भी नहीं। ऐसी हमारी सोच थी।

चित्त की ऐसी दोलायमान अवस्था में आज तक अंदमान के हमारे संस्करण हमारे प्रिय बंधुओं को सुनाने का काम वैसा ही रह गया। हमारे बाद अंदमान आकर हमारे पहले जो मुक्त हुए थे, ऐसे कतिपय राजनीतिक बंदियों ने अपने-अपने अनुभवों को प्रसिद्व किया- ऐसा हमने देखा। अन्यत्र भी


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