कोई काला कलूटा, बीच-बीच में कहीं दर्शनीय- इस तरह विभिन्न स्वरूप तथा मुद्रा के वे मानव प्राणी। कोई छाती तानकर अकड़ रहा है, कोई दनदनाता हुआ चल रहा है, जैसे कोई महान् पराक्रम करके आ रहा हो, कोई इस तरह हेकड़ी जता रहा है जैसे:नमयतीव गतिर्धरित्रीम्’, तो कोई दुःख भार से शीश झुकाए लज्जा के मारे पानी-पानी होकर घबराते हुए इधर-उधर देखता हुआ। सिपाहियों के नियंत्रण में दो सुनिश्चित पंक्तियों में चलते-चलते उनकी बेड़ियों की लयबद्व झनझनाहट- यह सारा दृश्य देखते समय एक तरह का भयंकर मनोरंजन अवश्य हो रहा था।
क्रूर डकैत
वह देखिए , एका डाकू- उग्र, दाढ़ी-मूंछे, लंबे-लंबे बाल। उजड्ड-जंगली मोटी-मोटी और क्रूर गोल-गोल घूमती आंखें, वह सिंधी मुसलमानों में एक छंटा हुआ क्रूर डाकू! ब्ंदी के वस्त्र भी बड़ी सुघड़ता के साथ बांधकर, पैरों की बेड़ियों सहजतापूर्वक कमर
आखिर कुछ दिनों बाद बाइबिल मिल गई। बहुत दिन से पुस्तक न होने के कारण हाथ में आते ही लगा कि पढ़ा जाए। बाइबिल खोली, तभी प्रहरी ने बताया-
पुस्तक कोठरी में नहीं रखी जाएगी, शाम के समय कामकाज समाप्त हाने पर बस एक दो घंटों के लिए ही मिलेगी। अतः एसे वापस लौटाया और पुनः कठोर परिश्रमार्थ जो काम दिया था, वह करने लगा। करते-करते मन-ही-मन कविता की रचना करता रहा। आखिर शाम के समय बाइबिल हाथ पड़ी।
ईसा मसीह के चरित्र तथा उपदेश