उन बदमाशों को दिया जाता है जिन्हें सारे इलाके में अन्य सभी अपराधियों से भंयकर तथा नृशंस समझा जाता है। कालेपानी के इन दंडितों मंे से जो भयंकरों में भयंकरतम सिद्व होेते हैं, उन्हें आजन्म कारावास का दंड होता है। उन्हें पहले इलाकों के स्थानीय कारागारों में रखा जाता है, तत्पश्चात् कुछ दिनों बाद उनकी परीक्षा ली जाती है। इसमें जो स्वदेश और स्वसमाज में रखने के अपात्र सिद्व होते हैं, उन्हें उनके संबंधित ठिकानों से ठाणे भेजा जाता है? और वहां इन अपराधियों, जो देश के भयंकर असली बदमाश सिद्व होते हैं, के झुंड को अंदमान भेजने के लिए कुछ दिन तक रखा जाता है। उनके इस अगली यात्रा के लिए होने वाले आगमन को ही हम बंदियों की परिभाषा में ‘चालान’ कहा जाता है। नामी चोर, निर्दयी, खतरनाक डाकू, नृशंस हत्यारे, आग लगानेवाले, उग्र अपराधियों में भी भयानक समझे जानेवाले आदि तमाम
‘सज्जनों’ का समूह आज ठाणे के कारागार में पधार रहा था।
भायखला कारागृह
डोंगरी की एंकात कोठरी से भायखला की एकांत कोठरी पर चढ़ते समय गहराते एकांत तथा उदासीनता की अगली सीढ़ी चढ़नी पड़ी। डोंगरी में आस-पास कोई मनुष्य नहीं रहता था, परंतु कम-से-कम दूर से कोलाहल तो सुनाई देता था। आस-पास मनुष्य ही नहीं बल्कि एक-दो पुस्तकें तथा वे वस्तुएं भी जिनका मैं अभ्यस्त था, शेष नहीं थी।
समान का भी एक तरह का संग-साथ होता है, जेसे परिचित जनों क वियोग से सबकुछ शून्यवत् लगने लगता है। कोठरी का निरीक्षण किया।