गीता। ये दो वस्तुएं ही मेरी संपत्तिा थी। पंरतु आज सवेरे हवलदार ने इन दो वस्तुओं की भी मांग की,‘‘साहब मांगता है।’’ मेरी


समझ में नहीं आ रहा था कि उपनेत्र की मांग क्यों? थोड़ी देर बाद सुपरिटेंडेंट आया। मैंने पूछा,‘‘उपनेत्र क्यों लिए गए?’’ उसने बताया, ‘‘राज्यक्रांति के अपराण में तुम्हारी सारी चीजें जब्त¹ की जाएं, ऐसा दंड होने के कारण उन वस्तुओं को जब्त किया गया है। विलायत में जब आप पकड़े गए तब आपके पास से मिले टंªक, कपड़े, पुस्तकें आदि सभी सामान की आज खुले रूप में नीलामी होगी। जो पैसे मिलेंगे वे सरकार में जमा होंगे।’’

निजी संपत्तिा के रूप में एक आने की गीता और उपनेत्रों का भी अपहरण किया जाए, इससे अन्य बंदियों को दुःख हुआ और कुछ सिपाहियों ने ठान ली कि वे इस नीलामी में सामान नहीं खरीदेंगे। मुझे इस बात का पता लगते ही मैंने उन्हें सूचित किया कि उस सामान


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बोरिया-बिस्तर उठा लो।’’ मैंने अपना बिस्तर उठाया। सोचा, यह क्या-कहीं अंदमान तो नहीं जा रहे हैं। द्वार के पास आया, वहां जेल की गाड़ी खड़ी थी। मैं। भीतर बैठ गया, गाड़ी बंद हो गई, इतनी कि बाहर का कुछ भी दिखाई नहीं दिख रहा था। न दिशा, न मार्ग-केवल खड़खड़ाहट सुनाई दे रही थी। गाड़ी रूक गई- एक ओर जेल के पास अपने आपको खड़ा पाया। भीतर सोलह संस्कार किए गए, जो एक नए बंदी के लिए किए जाते हैं। आखिर कोठरी में बंद हो जाने के बाद देखा तो मैं एक


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