ब्राह्मण ने¹ गोली से उड़ा दिया। सुना है, चिदंबर पिल्लै के प्रकरण से उस अधिकारी का कुछ संबंध था। ’’ वह हवलदार जब दोपहर में पुनः आया तो मेरी ओर घूरते हुए उसने कहा, ‘‘ क्यों महाराज, मद्रास में आपका कोई स्नेही रहता है!’’

‘‘इस बंदीशाला में रहकर भला मैं कैसे जान सकता हूं कि कौन कहां है और थोड़ी देर पहले आप ही ने तो कहा था कि जो कोई हैं वे बुरके में बैठे हैं। कहने भर के लिए भी वे चूं तक नहीं करते हुए कहा ‘‘अर्क हैं अर्क, अवतारी हैं ये। ‘‘इसका निश्चित अर्थ आज तक मैं नहीं जान सका। हो सकता है, उसे संदेह हुआ हो कि मद्रास की जो वार्त्ता उसने सुनी, वह मैंने भी सुनी होगी और मेरे उत्तर का व्यंग्य उसने समझा हो।

उपनेत्रों की नीलामी

उस समय मेरे पास मेरी अपनी केवल दो चीजें थी- एक मेरे उपनेत्र (ऐनक) और दूसरी एक आने की छोटी सी अंगुलाकार


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के समय आपको यदि साहब ने सोते हुए देख लिया तो वे हमें क्या कहंेगे।’’ दरवाजे की सलाखों पर अपना डंडा जोर-जोर से खड़काते हुए सिपाही बोला।

मैं उठ गया। पुनः वही तूमार- उसे कूटना-खोलना-वही पिश्टपेशण ं ं ं ं ं ं

दंड प्रारंभ हुए प्रायः एक महीना बीत गया था। मुझे अभी भी वही भोजन मिलता था जो कच्चे बंदी को दिया जाता है, अतः मुझे दूध भी मिलता था। मैं अभी अभी भोजन से निपटा ही था। इतने में हवलदार ने मुझे बाहर बुलाया और तभी सपरिटेंडेंट भी आया,’’ अपना


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