लगने लगा है। ऐसी स्थिति में जो कुछ बतलाया जा सके, वह हमारा अंदमान का वृत्तांत है- यह कह देने का निश्चय हमने किया है। सुसंगत वृत्तांत-कथन असंभव है, यह तो जाहिर है। अतः जो कुछ संक्षिप्त, टूटे-फूटे तथा संबंधविहिन संस्मरण हम बता सकेंगे, उन्हीं के प्रति पाठक संतोश् मान ले और उनके बीच जो विसंगतियां अथवा अस्पश्टता होगी, उसे परिस्थिति का दोश मानकर कुछ दिनों के लिए क्षमा कर दें।
हम जानते हैं कि ऐसे वृत्तांत का सार्वजनिक उपयोग बहुत बड़ा है ; परंतु केवल वृत्तांत से अधिक ऐसी दुर्घट परिस्थिति में उदित विचारों, विकारों तथा भावनाओं का इतिहास विशेश मनोरंजक होने के साथ-साथ बोधप्रद भी होने के कारण हम इन संस्मरणों में उसे अधिक महत्तव देने वाले हैं; परंतु चूंकि ये संस्मरण त्रुटित हैं और भावनाओं का वह इतिहास अस्पश्ट, सूचक तथा हलके-हलके रूप में ही बताना बेहतर होगा।
हुआ, कहने में कोई रूचि नहीं और जो कहने लायक लगता है, उसे परिस्थितियां कहने नहीं देती। ऐसी अवस्था में कुछ भी बताते हुए कथ्य का चित्र रंगहीन तथा सत्वहीन कर देने की अपेक्षा अभी कुछ भी ने बताएं। जब वह दिन आ जाएगा कि सारी गूढ़ आकांक्षाएं अभिव्यक्ति हो सकें, सारी मूक भावनाएं खुलेआम बातें कर सके, उस दिन जो कुछ कहना है, यथा प्रमाण कह देंगे। यदि ऐसा दिन इस जिंदगी के दौरान निकलकर नहीं आया, तो नहीं कहेंगें यदि उस वृत्तांत को जगत ने नहीं सुना तो उस वजह