अच्छी तरह से जानते हो कि तुम कौन हो? तुमने क्या और क्यों किया है? चोरों के तमाशे से तुम्हारा क्या बिगड़ता है? तुमसे पहले यह कांटों का ताज उन्हें भी धारण करना पड़ा जो अपने आपको पे्रषित कहलाया करते थे। आज द्वीप-द्वीपांतर जिनके चरणों पर अपने शीश झुका रहे हैं, तुमसे पहले कारागार के बंदियों ने उनकी दुर्गति की थी। इस तरह विवके के साथ मैं उस व्यक्ति का व्यवहार सहता रहा। आज सोलह वर्ष बीत चुके थे, पंरतु अभी तक मैं
निश्चित रूप में यह नहीं कह सकता कि उस मनुष्य को जैसे कि कुछ बंदियों का कहना था- मुझे मानसिक यातनाएं दिलाकर मेरा तेजाभंग करने के लिए ही हेतुपूर्वक नियुक्त किया गया था अथवा उसका उस तरह का व्यवहार मात्र सहानुभूतिपूर्ण वाहियातपन था। कुछ भी हो, उसका वह गीत आज भी मेरे कानों में गूंज रहा है,‘ अजब तेरी कुदरत अजब तेरा खेल, मकड़ी के जाल
उच्चारण किया-मन को डांट पिलाई और जिस तरह किसी बछड़े को खींचकर लाया जाता है, उसी तरह मन को खींचकर विवेक के खूंटे से बांध दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मेरी संपूर्ण शक्ति निचुड़ गई है। कोठरी में बंद करके हवलदार के जाते ही मै। निढाल होकर भूमि पर लेट गया। देखा तो ऊपर कबूतर के बच्चे अकेलेपन के दुःखित स्वर में आक्रोश व्यक्त कर रहे थे, तड़प्प रहे थे। उनकी मां सवेरे एक साहब की बंदूक का शिकार बन गई थी और बच्चे, हमेशा की तरह वह चोंच मे दाने