नियमपूर्वक राजनीतिक चर्चा करके मेरे मन पर यह प्रभाव जमाने का प्रयत्न करता कि मैंने अत्यंत निरर्थक एवं पागलपन का काम करके नादानीपूर्वक जीवनहानि की है। आते-जाते बंदियों को सकारण बुलाकर मुझे दिखाता और उनसे कहता,‘देखो, हमारा सिंहपुरूष हो तो ऐसा! पर क्या? राव अजब तेरी करनी, अजब तेरा खेल! मकड़ी के जाल में फंसाया शेर।’ यह गीत गा-गाकर स्वांग करता, नाचता और स्वयं ही पूर्व पक्ष-उत्तर पक्ष करते हुए विवाद छेड़ता कि ‘कहां इतनी प्रबल सरकार और कहां ये अकिंचन चार बच्चे! च्ले हैं अंग्रेज सरकार का राज लेने।’ ऐसा कहते हुए हाथ में पकड़ा सोटा तलवार जैसा घुमाते हुए- दो-तीन पैंतरे काटकर नाचता और अपने साथ लाए दो-तीन कैदियों से वह पूछता, ‘क्यों रे रामू, मेरे इस तरह वार करने से हवा मरी?’ सब लोग जोर-जोर से ठहाके लगाते। हवलदार की ठिठोली थी! न
अपने घर में बैठकर ही गपशप कर रहे हों। अवसर पाकर मैंने बीच में ही कहा, ’’ठीक है, ईश्वर की कृपा हुई तो पुनः भेंट होगी ही। इस बीच कभी इस सामान्य संसार का मोह होने लगे तो ऐसा विचार करना कि संतानोत्पत्तिा
करना, चार लकड़ी-तिनके जोड़कर घोंसला बनाना ही संसार कहलाता हो तो ऐसी गृहस्थी कौए-चिड़िया भी बनाते हैं। परंतु गृहस्थी चलाने का इससे भी भव्यतर अर्थ लेना हो तो मानव सदृश घरौंदा बसाने में हम भी कृतार्थ हो गए हैं। हमने अपना घरौंदा तोड़-फोड़ दिया,