आपको सावधान किया है।’’ इस तरह बिना रूके परंतफ बहुत ही दबे स्वर में बोलते और अंदर घुसते हुए उसने कहा, ‘‘ आपका भाई यहीं पर है।’’
‘‘कौन सा भाई?’’
‘‘छोटा।’’ उसे संदेह हुुआ, कोई देख तो नहीं रहा, वह झट से पीछे हट गया, मैं भी भीतर खिसक गया।
कनिष्ठ बंधु1
छोटा भाई! ब्ीस की आयु के नीचे का वह लड़का, जिसे अहमदाबाद2 में लाॅर्ड मिंटो पर बम फेंकने के आरोप में अठारह वर्ष की आयु में ही जेल में बंद होकर साहस के साथ उन यंत्रणाओं का सामना करने का अवसर मिला था। अहमदाबाद से उसे छोड़ा गया तो घर आकर बिस्तर पर जरा पीठ ही टिकाई थी कि राज्यक्रांति तथा राजनीतिक हत्या के गंभीर आरोपों में उसे पुनः पकड़कर कारागार में डाल दिया गया। लेकिन वर्ष भर एक के बाद एक यातनाओं, धमकियों तथा निर्दयता के आघात सहते हुए उस कोमल आयु
व्यक्ति विशेश का दोश नहीं है- मेरे विचार से इससे इसी का निदर्शन होता है कि परतंत्र राश्ट्रों की कैसी दुगर्ति बनी है, वहां मानवता भी कितनी महंगी है!
बलिदानी वीर या अधम
कोठारी के द्वार की सलाखों से कोई झांक रहा था, ’’क्यों, कैसे हो बैरिस्टर, ठीक हो न!’’
’’हां, आपके आर्शीवाद से ठीक हूं।’’ मैंने कहा।
’’ना-ना, महाराज, कहां आप, कहां हम! क्ल ही यूरोप से आए अपने एक मित्र से मेरा संभाशण हुआ। उसने बताया,’सारे यूरोप में सावरकर को एक हुतात्मा जैसा