आजीवन कारावास का अर्थ मनुष्य के जीवन के कर्तृव्य के सामान्य काल से किया जाता है। इंग्लैंड आदि देशों में यह अवधि चैदह वर्ष की है, हिंदुस्थान में वे अपराध के हिसाब से बीस अथवा पच्चीस वर्ष मान सकते हैं। यह अवधि ही दंडविज्ञान में जीवन काल है। अधिक-से-अधिक दंड की यही अवधि है। अतः मुझे प्राप्त दो आजन्म कारावास यदि एककालिक नहीं किए गए और एक आजन्म कारावास काटने के उपरांत दूसरा आजन्म कारावास काटने का अर्थ लिया गया, तो दंडविज्ञान की भाषा में ही इस जन्म की समाप्ति के पश्चात् यह दंड भुगतने के लिए दूसरा जन्म लेना चाहिए- यह हास्यास्पद होगा और वास्तव में यह पचास वर्ष कालेपानी की भीषण पद्वति से मरने का अर्थ है- यह जन्म खत्म करके दूसरे जन्म में भी दंड भोगना है। तो यह हास्यास्पद अर्थ टालने के लिए भी मेरी मुक्ति का वर्ष 1960 न रखते हुए आजन्म कारावास अर्थात् पच्चीस वर्ष-
पीछे अपने कार्य का क्या होगा ं ं ं ंयदि ं ं ं फिर ये कश्ट भी ं ं ं ंपरंतु मन का संतुलन फिर से संभालना।
सर हेनरी काॅटन
एक दिन जेल में यह हल्ला हुआ कि मेरे कारण किसी बड़े साहब की पंेशन बंद की गई है। यह क्या प्रकरण है? कुछ दिन पश्चात् ’केसरी’ का एक टुकड़ा अचानक
काल कोठरी में मेरे हाथ लग गया। उसके द्वारा इस वार्त्ता का तथ्य थोड़ा समझ में आया। लंदन में नूतन वर्ष के उपलक्ष्य में वहां के भारतीय लोगों द्वारा एक गोश्ठी आयोजित की गई थी। उस समय सभा