लोगों में घुल-मिल जाने का सुअवसर प्राप्त होगा, उसके योग से पुनः प्रचार और लोकोपयुक्त कार्य भी करना संभव होगा। दस वर्षों के पश्चात् अपने परिवार के साथ घर भी बसाया जा सकता है और उनका, जिन्हें कोठरी के इस बंदीगृह की सुरंग में ही सारी सजा काटनी है? उनमें से कोई मेरे बाल मित्र थे, कोई विश्वस्त सहयोगी थी तो कोई अभिन्नह्नदय सहचारी थे- प्रायः सभी मुझपर असीम श्रद्वा रखते थे, मुझसे निस्स्वार्थ प्रेम करते आए थे। उन पर तथा उनके परिवारों पर आ पड़े संकट में मैं उन्हें नहीं बचा सका, न ही उनकी किसी तरह सहायता कर सका। इस भ्रान्ति से कि मेरे कारण ही उन्हें इतनी सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा ह, क्या वे मुझसे रूष्ट नहीं हुए होंगे? उस पर भी मुझे उनकी वृद्व ममतामयी माताओं पर, जिन्होंने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया और उनसे उनकी अंधे की
लाठी नियति ने अचानक छीन
छंद) बन चुकी थाी-जटाएं सुलझाना भी समाप्त हो चुका। हाथ छिल गए थे, छाले पड़ गए थे, जिनसे लहू रिसने लगा था। इसबात का मुझे स्मरण नहीं कि हेग के निर्णय के पश्चात् डोंगरी के बंदीगृह में मैं कितने दिन पड़ा रहा। प्रातःकाल उठना, व्यायाम के लिए टहलते हुए मुखोद्गत योगसूत्रों का पाठ करना, उनमें से अनुक्रम से प्रत्येक पर विचार करना, फिर कठोर परिश्रम के तौर पर जो कठोर काम मिले वह करना, उसे करते करते ही मन में दस-बारह नई कविताओं की रचना और पुरानी कंठस्थ