पुस्तक कोठरी में नहीं रखी जाएगी, शाम के समय कामकाज समाप्त हाने पर बस एक दो घंटों के लिए ही मिलेगी। अतः एसे वापस लौटाया और पुनः कठोर परिश्रमार्थ जो काम दिया था, वह करने लगा। करते-करते मन-ही-मन कविता की रचना करता रहा। आखिर शाम के समय बाइबिल हाथ पड़ी।
ईसा मसीह के चरित्र तथा उपदेश के विषय में मेरे मन में हमेशा आदर भाव था। फ्रांस में मैं बाइबिल की नई पोथी (न्यू टेस्टामेंट) का चिंतन और अध्ययन करता था। अब गोविंदसिंह की ‘आर्या’ समाप्त होने को थी और ‘सप्तर्षि’ भी पूरा होने को आ गया था। भावी काव्य-रचना के लिए आवश्यक ऐतिहासिक साहित्य साधन प्राप्त नहीं थे, और यह भी स्पष्ट निश्चित नहीं किया था कि किस विषय पर काव्य-रचना करनी है, अतः पहले ईसा का चरित्र ही मराठी में कविताबद्व करने का निश्चय किया। बाइबिल की पुरानी पोथी (ओल्ड टेस्टामेंट) का
सकती, उलटे मेरे सिर पड़ी असफलता की तीव्रता अधिक कश्टप्रद हो सकती है। आज मेरा ध्येय यशोमयी राजप्रासाद के पैरों तले गहराई में दबी अपयश की उस नींव का चिंतन करना है। इसीलिए आज मुझे गुरू गाविंदसिंहजी की असफलता की गाथा गानी है, ’चमकौर’ दुर्ग से पलायन करते समय जिनका संपूर्ण पराभव हो गया है, जिनके माता-पिता, पत्नी-पुत्रए पूरे परिवार का सर्वनाश हो गया है, जिनके शिश्यों ने उनके प्रति श्शपथपूर्वक उठाई निश्ठा उन्हीं के सिर फोड़ा, फिर भी इस नरकेसरी ने दुःख