में कहीं कुछ भूल-चूक तो नहीं हुई? इतने में अंजलि भर गई और पानी मुंह में चला गया तो मुख ‘थू-थू’ करते हुए विद्रोह पर तुल गया। जीभ एकदम खारी बन गई। तब साहस जुटाकर जमादार से पूछज्ञ, ‘यह पानी खारा कैसे हुआ?’’ उसने कहा, ‘‘भला समुंदर का पानी कभी मीठा होता है?’’ तब ध्यान आया कि हम समुद्र स्नान कर रहे थे। पीने के पानी की कमी होने से अंदमान में स्नान, कपड़े धोने आदि के लिए सर्वत्र समुद्र का पानी प्रयोग किया जाता है। वह भी किसी कुंड में संचित।
सारा तन चिपचिपा हो गया। बाल कड़े-रूखें-कठोर हो गए थे। काश, स्नान के पचड़े में न ही पड़ता। परंतु पुनः सोचा, अब इसकी आदत डालनी ही पड़ेगी। लंदन, पेरिस के ‘टर्किश बाथ’ का आनंद लिया है, अब ‘अंदमानिश बाथों’ का आनंद लेना चाहिए! राष्ट्रीय पापों का क्षालन उत्तम साबुन तथा सुगंधित तेल मल-मलकर
रहा था कि मेरी अरथी सजाई जा रही है, मेरी अरथी निकल रही है। मुझे इस यथार्थ का भी बोध हो रहा था कि इन सैकड़ों दर्शकों की दृष्टि, जो मुझपर टिकी हुई है, वह प्रायः निर्मम तथा तटस्थ है। जिस तरह राह चलते आकस्मिक रूप से किसी की निकली हुई अरथी हम देखते हैं, पल भर उसकी ओर देखते-देखते हम अपनी राह जाते हैं। उस समय इस बात का आकलन होने से कि मै। शव बन रहा हूं, मुझे इस यथार्थ बोध का ही अधिक दुःख था कि हजारों देशबाध्ंाव मेरी ओर मात्र आंखें