है, इसके अतिरिक्त नित्य नग्नावस्था में रहकर सूर्य प्रकाश में शरीर अनावृत रखना अनिवार्य होता है। क्योंकि कपड़ों का अत्याधिक मोह, शरीर को सूर्यदर्शन लगभग आमरण और शायद मरने के पश्चात् भी यूरोप में होने नहीं देता, अतः डाॅक्टरों की यह राय बन चुकी है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से यह हानिकारक है। इस तरह के विचार मस्तिष्क में मंडरा ही रहे थे कि हाथों से फटाफट अपने कपड़े और चड्डी (कैदियों को दिया जानेवाला घुटना) उतारकर बिलकुल नंगा होकर लॅंगोटी पहन ली। अन्य राजनीतिक बंदियों की तरह प्रथमतः लॅंगोटी पहनते समय लज्जावश जो हिचकिचाहट होती है, वह नाटक देखने को नहीं मिलने के कारण उनकी मुद्रा से यह स्पष्ट हो गया कि उनके अनुसार मैं बहत ही निर्लज्ज मनुष्य हूं। जैसे-जैसे लंगोटी
पहनकर मैं प्रसन्नातापूर्वक स्नान करने गया। मैं कटोरा (दंडित को दी हुई थाली) भर-भरकर पानी लेने लगा।
सवार होना और शव को अरथी पर सजाना एक ही बात थी। आज तक जो सैकड़ों-हजारों बंदी आजन्म कारावास की सजा काटने इस भयंकर जलयान पर चढ़कर कालेपानी गए, उनमें से दस भी जीवित वापस नहीं लौट सके। अठारह-बीस वर्ष की चढ़ती आयु के युवकों पर इस जलयान पर पैर रखते ही अस्सी वर्ष के बूढ़ों जैसी मुर्दनी छा जाती। मनुष्य एक बार अरथी पर बांध लिया गया कि उसके परिजन समझते हैं कि यह इस संसार से सदा के लिए जा रहा है और भावना से दुःखित, विस्मित