जमादार ने सचमुच मुजरा करते हुए उनकी हां में हां मिलाईए‘‘ सोलह आने सच है, साहब।’’
‘‘मैं भी जानता हूं’’ मैंने कहा, ‘‘ पकड़े जाते ही मैंने प्रथमतः जो पुस्तक मंगवाकर पढ़ी- वह है अंदमान का सरकारी इतिवृत। मैं ठीक तरह से जानता हूं, पोर्ट ब्लेअर मार्सेलिस नहीं है।’’
‘‘ठीक है। यह देखो और जैसा मैं कहूं वैसा करो। मैं आपके काम आऊंगाा। हां, जमादार, इन्हें भीतर ले जाओ और सात नंबर की चाली की कोठरी में बंद कर दो।’’
प्रकरण-8
कोठरी में पहला सप्ताह
मुझे लेकर वह जमादार सात नंबर की इमारत में बंद करने चल पड़ा। रास्ते में एक हौज दिखाई दिया। जमादार ने कहा, ‘‘इसमें नहा लो।’’ चार-पांच दिन हो गए थे, मैं स्नान नहीं कर सका था। सागर यात्रा से शरीर अत्यधिक मैला हो गया था, घमोरियां निकल आई थी। अतः स्नान करने की अनुमति मिलते ही
अनुभव रहा होगा।’’उन्होंने कहा,‘‘मैंने तो मद्रास में सर्वत्र शांति ही देखी।’’ मैंने स्मित करते हुए कहा,‘‘ठीक है न! आप विश्वासपूर्वक कहते हैं कि इधर हर कहीं शांति है?’’ वह समझ गया। वह दूसरा अधिकारी भी मुसकराया। कहने लगा, ‘‘उन्हें सबकुछ ज्ञात होगा। केवल आप उन्हें उकसाने का प्रयास कर रहे हैं और वे आपको उकसा रहे हैं।’’
वह छोटी नौका, जो मुझे लेकर आई थी, अंदमान से आई हुई ‘महाराजा’ नामक विशाल वाष्पनौका से सट गई। मुझे हथकड़ी पड़ी हुई