के कारागृह के नियमों का पालन कीजिए। बस, मेरा काम हो गया। नियम के विरूद्व व्यवहार मत करना। अन्यथा मुझे दंड भी देना पड़ेगा।’’ इस बंदीपाल के ध्यान में यह बात नहीं आई कि अपना यह कथन- बंदियों के साथ राजनीति की चर्चा मत करना-यह मैं नियम विरूद्व व्यवहार कर रहा हूं-‘तुम नियम के विरूद्व आचरण मत करना अन्यथा मुझे दंड भी देना पड़ेगा-’ यह कहना कितना परिहासपूर्ण है।
‘‘और आपको एक सावधानी की सूचना देना मैं अपना कर्तव्य समझता हूं। आप यदि यहां से भागने की चेष्टा करेंगे तो भयंकर संकट में पड़ेंगे। इस जेल के इर्दगिर्द घना जंगल है। उनमें महाक्रूर, खूंॅखार, नृशंस जंगली लोग रहते हैं। वे आपके जैसे सुकुमार बालकों की टोह में रहते हैं, उनके चंगुल में फंसते ही वे उसे ककड़ी जैसा
चबाते हैं। हंसते क्यों हैं? क्यों जमादार, मैं जो कह रहा हूं सच है या नहीं?’’
‘‘अरे, कैसी बात करते हैं। इस मद्रास इलाके के लोग बड़े शिष्ट और विवेकशील हैं, न कि आपके इलाके के नवयुवकों के समान छिछले। इधर कोई प्रचारक आ भी गया तो उसे एक भी अनुयायी नहीं मिलेगा।’’ यह बात करते समय पग-पग पर उनका लक्ष्य इस पर केंद्रित था कि मैं उनका प्रतिरोध करने के लिए मद्रास के कुछ नामचीन क्रांतिकारियों के नाम तो नहीं उगलने लगा। बाद में स्वयं ही कहने लगे,‘‘आपका अनुभव कैसा रहा?’’ मैंने कहा, ‘‘मुझसे अधिक आप लोगों को मद्रास का