मदमतहलघ् ’’ चकराते हुए बारी साहब ने कहा, ‘‘आप ठहरे बड़े बैरिस्टर और मैं एक अनपढ़ जेलर, परंतु मेरे इस उपदेश को तुच्छ मत समझना। हत्या हत्या ही होती है। हत्याओं से कभी स्वतंत्रता नहीं मिलेगी।’’ (डनतकमते ंतम उनतकमते ंदक जीमल ूपसस दमअमत इतपदह पदकमचमदकमदबमण्)
‘‘बिल्कुल सही है। परंतु आप पहले यही पाठ आयरलैंड के सिनफिनवालों को क्यों नहीं पढ़ाते? आपको किसने बताया कि मैं हत्या का पक्षपाती हूं।’’ बात का रूख बदलते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अब सुपरिटेंडेंट साहब पधार रहे हैं। वास्तव में आपसे मेरा राजनीति विषयक चर्चा करना नियम बाह्म है। परंतु आप जैसे विद्वान, युवा तथा विख्यात मनुष्य को इस तरह के मक्कार बदमाशों में देखकर अंतःकरण छटपटाता है, इसीलिए इतना कुछ कहा। अब पीछे जो हुआ सो हुआ। उससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। आप यहां
कभी किसी से वार्त्तालाप प्रारंभ नहीं करता, क्योंकि मैं ठहरा एक बंदी, कोई भी फटाक से डांट पिलाएगा,‘चुप रहो।’ कुछ समय के पश्चात् इधर-उधर का कुशल-मंगल पूछकर उन अधिकारियों ने अपनी जिज्ञासा प्रकट की कि इंग्लैंड स्थित क्रांतिकारियों की मेरे पीछे कैसी अवस्था हो गई होगी। मैंने कहा,’’ यह तो आपको मुझे ताव दिलाने के लिए उन्होंने कहा, ’’ हां, यह भी सत्य है। और कैसे अकिंचन पड्यंत्र! चार लोग भी उनमें सम्मिलित नहीं थे।’’ मैंने हंसकर कहा,‘‘तो आप ही कुछ लोगों को इकट्ठा करते।’’