करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ॅमससए ंतम लवन जीम उंद ूीव जतपमक जव मेबंचम ंज डंतेमपससमेघ्’’(तुम ही वह आदमी हो जिसने मार्सेलिस से भागने का प्रयास किया था?) उसके इस उद्वत स्वर में पूछे प्रश्न का उतने ही उद्वत परंतु संयत स्वर में मैंने उत्तर दिया, ‘‘ल्मेए ूीलघ्’’ (हांॅ, क्यों?) मेरे उत्तर से बारी साहब का स्वर तनिक नरम हो गया। केवल कौतूहलपूर्ण स्वर में उन्होंने कहा, ‘‘ॅील कपक लवन कव जींजघ्’’(तुमने ऐसा क्यों किया?) मैंने कहा, ‘‘ इसके काई कारण हैं। उनमें से एक यह है कि इन सभी कष्टों से मुक्ति मिले।’’
‘‘परंतु इन कष्टों में तो तुम स्वयं ही कूदे थे न!’’
‘‘हां, यह सच है। क्यांेकि इन कष्टों में कूदना मुझे अपना कर्तव्य लगा। और उन कष्टों से यथासंभव मुक्त होना भी मुझे कर्तव्य ही प्रतीत हुआ।’’
‘‘देखो,’’ बारी साहब एकदम खुलकर हंसते-हंसते कहने
थी कि वहां से उन्होंने ‘अभिनव भारत’ की शाखा की सहायता से उसके सदस्यों में से एक शाक्त ब्राह्मण के हाथों तूतीकोरिन के कलेक्टर की गोली मारकर हत्या करवाई थी, पर उस समय यह भी मुझे ज्ञात नहीं था कि श्री अय्यर वापस लौट आए हैं।
मद्रास के उस कलेक्टर की हत्या का समाचार मुझे प्राप्त हो चुका था और बस इतना ही सत्य है कि मुझे यह संदेह था कि प्रायः मद्रास के ‘अभिनव भारत’ के किसी सदस्य द्वारा ही यह कठोर कृत्य संपन्न कराया गया होगा। परंतु इस आशा से कि मुझे
यह