जैसे एक जल्लाद सुंदर वस्त्र पहनकर फाॅंसी देने के लिए आते हुए शोभित होता है।

देशों की स्वतंत्रता-प्राप्ति का इतिहास पढ़नेवालों और तत्रस्थ निर्वासितों और दंडितों के आत्मवृत देखनेवालों ने जिन दृश्यों का वर्णन किया है, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, यह दृश्य उनसे अक्षरशः मेल खाता था। दोनों उद्दंड सार्जेटों ने मुझे पकड़कर उधर इस तरह खड़ा कर दिया कि उस दृश्य के भीषण जबड़ों से मेरा सारा मनोर्धर्य चकनाचूर हो जाए। वह भीषण्ता मेरी ओर आंखों से आंखें ििमला रहा था। दोनों का परिचय हो गया। मुझे एक अनोखी, अद्भुत संतुष्टि मिली। अच्छा, तो फिर मैंने जो पढ़ा वह स्वयं अनुभव किया और उधर इन दृश्यों के जबड़े में बिना टूटे निष्कंप-निर्भयता के साथ खड़ा हो गया। ब्रिस्टन की लंदन स्थित जेल में मैंने ‘दो मूर्ति’ तरह के उद्गार मेरे ह्नदय में उभरने लगे।

बारी बाबा का उपदेश

मनोविकारों के बवंडर से


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उसी समय मद्रास में कलेक्टर अशे की हत्या हो चुकी थी। अधिकारियों को संदेह था कि इस हत्या का संबंध यूरोप स्थित‘अभिनव भारत’ के एक नेता से जुड़ा हुआ है। अतः मेरा अनुमान था ही कि इस संबंध में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में मुझसे कुछ-न-कुछ अवश्य पूछा जाएगा। इंग्लैंड में मेरे पकड़े जाने के बाद मुझे हिंदुस्थान में वापस लाया जा रहा था और मेरा प्रकरण समाप्त होने पर मुझे अंदमान ले जाने की व्यवस्था हो रही थी, तब सचमुच ही मैं यह नहीं जानता था कि ‘अभिनव भारत’ के


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