खड़ा किया। इतने में आस-पास के प्रहरियों में खुसर-फुसर प्रारंभ हो गई-‘बारी साहब आ रहा है।’ बारी साहब से अधिक निष्ठुर अथवा कठोर व्यक्ति उन्हांेने कभी नहीं देखा था, अतः वे इस उत्कंठा से मेरी ओर ताकने लगे कि उसका नाम लेते ही मेरे मुख पर क्या प्रतिक्रिया होती है। परंतु मैं तो उस भीषण भव्य कारागृह के दो लौह दरवाजों के बीच के हिस्से को सुशोभित करने के लिए जो आभूषण धारण किए गए थे, उन्हें परखने में व्यस्त था। विभिन्न प्रकार से हथकड़ियां एक-दूसरी में गूॅंथकर उनके भद्दे, भांेडे फूल दीवार पर लगाए गए थे। पैरों की बड़ी-बड़ी बेड़ियां, दंड-बेड़ियां और अन्य आयुध, जो मनुष्य के शरीर को कष्ट देते हैं, सामने के हिस्से पर एक पंक्ति में लटक रहे थे। उस उग्रता की भी एक शोभा थी। उस बेयाॅनेट, बंदूकों, बेड़ियों


हथकड़ियों के सौम्य आभूषणों से वह भीषण तुरंग इस तरह शोभायमान होता


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गई है।’’ अन्य अधिकारी भी विदा लेते हुए चले गए। मार्सेलिस की लंबी-चैड़ी गप्पें सूनने के कारण उनकी यही धारणा बनी थी कि इस यात्रा मंे भी मैं उन्हें बहुत तंग करूंगा। अंगे्रज को देखते ही मेरे तन-बदन में आग लग जाती है। मैं कोई उद्दंड, अशिष्ट तथा भयंकर व्यक्ति हूं। परंतु इस यात्रा में उन्हें जरा भी कष्ट न हुआ और मुझे अंत में मद्रास के अधिकारियों को सौंपने के पश्चात् जैसे उनका मन शांत हुआ और उन्हें मुझमें इतने सद्गुण दिखाई दिए कि उन्होंने टोपी उतारकर मुझे प्रणाम भी किया।


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