का सिल्वर जेल।’’ इस बारी बाबा का और सिल्वर जेल कर उल्लेख सिपाहियों ने बंदियों को धमकाने के लिए जहाज पर इतनी बार किया था कि उन सिपाहियों की मान्यता कुछ गलत नहीं थी। यह सिल्वर जेल है, यह कहते ही उसके आंतरिक स्वरूप का पूर्ण बोध हो गया। वह और अधिक कृपालु होकर बिना पूछे ही कहने लगाए’’ अब
उधर ही जाना है। वहीं बारी बाबा के घर पर ठहरना है आप सबको।’’
हम सभी दंडितों के सिर पर बिस्तर तथा हाथ में थालीपाट देकर एक पंक्ति में नीचे उतारा गया। जहाजघाट पर आते ही अन्य बंदियों को सिपाहियों तथा बंदियों के पहरे में ऊपर भेजा गया, केवल मुझे ही यूरोपियनों के पहरे में अलग रखा गया। उधर जहाजघाट पर बैठे-बैठे मेरे मन में विचार आ गया कि अंदमान में ऐसे स्थान पर बसाया गया है कि हिंदुस्थान की सामुद्रिक सुरक्षा की दृष्टि से उसका महत्तव कभी भी कम होना असंभव है।
के दूसरे हिस्से में, जो लोहे के सीखचों से मेरे हिस्से से अलग किया गया था, कालेपानी के सारे बंदी धमाचैकड़ी मचा रहे हैं। गरमी के दिन। अंगार बरसाती चिलचिलाती धूप, असहनीय उमस। कोई बारात भी उत्सवार्थ यात्रा कर रही होती तो भी उसे यात्रा सुखद नहीं लगती। तिसपर मैं तो कालेपानी के आजीवन कारावास के लिए जा रहा था। डिब्बे के बाहर मोगलाई मैदान आंवे की तरह तप रहे थे। भीतर उस डिब्बे में उमस की उतनी ही तीव्रता से अंग-अंग छअपटा रहा था और उस ऊष्मा की तीव्रता तथा