परिश्रम कराया जाता है कि वहां जाने के नाम पर बंदी भी थर-थर कांपने लगते हैं। इनके अतिरिक्त जंगल कटाई के लिए जिन टोलियांे को भेजा जाता है, उनके दुर्भाग्य की तो कोई सीमा नहीं होती।
अंदमान¹ में पहले-पहल जिन-जिन बंदियों की टोलियां भेजी गई वहां पहुंचने पर उन्हें पहले लगभग मुक्त छोड़ा जाता । आगे उनसे कुछ वर्षों तक सरकारी कैद में
काम करवाया जाता। जो स्वतत्रं रहते, वे धान की खेती करते। उनके वंशजों की जो बस्ती बढ़ती गई, उन्हें फेरी अर्थात् ‘फ्री’ कहा जाता है। आज उनमें कितने सारे शिक्षित तथा शिष्ट लोग हैं। आगे चलकर हिंदुस्थान से बंदी आते ही उन्हें कुछ दिन के लिए कारागृह में रखने की योजना बनाई गई। इसके लिए और अंदमान स्थित अपराधियों के लिए एक नया विशाल कारागृह बनाया गया।
जी हां, यही है वह सिल्वर जेल अथवा ब्मससनसंत श्रंपास, आगे चलकर जहां राजनीतिक
मुझे डिब्बे में ठूंसा गया। परंतु ऐसा नहीं कि किसी ने मुझे देखा ही नहीं। जो लोग उधर उत्सुकतावश आए हुए थे उन्हें दूर खदेड़ा जाता। परंतु कुछ सूरोपियन भी देखने के लिए आए थे। वे डिब्बे के पास आते, उनमें से कुछ लोग बंद खिड़कियां खोलकर देा शिष्ट शब्द शिष्टतापूर्वक बोलते अथवा उद्दंडतापूर्वक देखकर चले जाते। उन पर कड़ी पाबंधी नहीं थी। गाड़ी छूटने के बाद जहां-जहां वह खड़ी होती, उस स्टेशन पर पहुंचने से पहले मेरे डिब्बे की सारी खिड़कियां बंद कर दी जाती। जब से इंग्लैंड