का दंडापेठ। उसी गोकुलावन् बाराटाॅंग, कालाटांग आदि नामकरण भी श्रवणीय हैं। अज्ञात बातें वस्तुओं के स्वभाव से ही ज्ञात होती हैं, ऐसे ही अज्ञात शब्द भी भाषाशस्त्र में ज्ञात वस्तुओं के स्वभाव के आधार से ही उच्चारित होने की जो सहज प्रवृत्तिा होती है, उसका एक मनोरंजन उदाहरण है। बिना किसी साधारण संकेत के उन अंगे्रजी शब्दों के रूपांतर को अपने आप ही भारतीय मुखों द्वारा हिंदीत्व प्राप्त हो गया है।
इसके प्रत्येक जिले में दंडितों की इमारतंे बनवाई गई हैं और उनमें एक-एक कारखाना खोला गया है। उदाहरणार्थ, फिनिक्स में लोहा, पीतल, सीपियों, कछुओं की पीठ आदि से अनेक सुंदर चीजें बनाने का शिल्प कार्य जारी है, जिसमें चार सौ शिल्पज्ञ बंदी कार्यरत रहते हैं। नेव्हीवे फट्टे में सब्जियों का बागान हैं चॅथम में जंगली लकड़ियों को बनाने का तथा आरी से चीरने कर कारखाना है। कालाटाॅंग में चाय का बागान है। उधर इतना कठोर
स्टेशन पर आते ही मुझे एक स्वतंत्र डिब्बे में ठूंसा गया। मेरे हाथों में जो हथकड़ी थी, उसका दूसरा सिरा एक भीमकाय अंगे्रज अधिकारी के हाथ से जकड़ा हुआ था। मेरे लिए उस बेचारे को हथकड़ी पहननी पड़ी। मेरे पैरों में बेड़ियां तो थी ही, हाथ में हथकड़ी थी। इतना ही नहीं अपितु उसने मेरे दूसरे हाथ को भी कस लिया था। धोती खोंसनी हो तो उसके हाथ से खोंसनी पड़ती। उस अधिकारी के हाथ से मेरा हाथ बांधने के कारण शौच, लघु शंका सब विधियां साथ-साथ, सोना भी साथ-साथ। कई यात्राओं में इस प्रकार का घिनौनापन तथा कष्ट सहना पड़ा।