उधर भूमि के गुट तथा बागान की बिक्री किस दर से होगी, इसे पहली बार हिंदुस्थान में विज्ञापित करके फिर उन्हें बेचा गया अथवा वह कुछ खास लोगों के हाथों में जा रही है, आदि पूछताछ कोई कौंसिलर अवश्य करें। उसी तरह अपने उन जाति-बंधुओं की स्थिति कैसी है, जो उधर एकाकी हो गए हैं- यह एक बार प्रत्यक्ष देख आने के लिए, कौंसिल के लोक नियुक्त पक्ष को चाहिए कि वह किसी कौंसिलर को उधर भेज दे। वे बेचारे गूंगे हैं। उनके पास अपनी स्थिति सुधारने के लिए कोई साधन नहीं, अतः आपको उनका मुख बनना होगा। आर्यसमाजी उपदेशकों में से भी किसी प्रमुख उपदेशक को उधर भेजना आवश्यक है। वहां बहुसंख्य लोग हिंदू होने पर भी और इस बात के लिए प्रयत्नरत होते हुए भी कि स्कूलों में हिंदी भाषा पढ़ाई जाए- दैनंदिन लेखन की भाषा उर्दू ही है। इतना ही नहीं, भारतीय अथवा हिंदू बच्चों को भी स्कूलों में मातृभाषा


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गुपचुप अन्य मार्ग से ले जाना आवश्यक था। यह एक कारण था और दूसरी बात यह कि मंै मार्सेलिस से भागा हुआ और वे गुप्त षड्यंत्र के दिन! न जाने कौन कहां कैसा षड्यंत्र रचकर मेरी मुक्ति का प्रयास करे-क्या कह सकते हैं। सहज डग भरते उन दिनों सुरंग उड़ती थी। ऐसी स्थिति में मार्संेलिस


का प्रमाद फिर से न दोहराया जाए, इसलिए मुझे स्टेशन पर उस जन-समुदाय में से पैदल ले जाने की बजाय स्वतंत्र मोटर में ले जाया गया।

इस तरह जब-जब मुझे स्वतंत्र मोटर से विशेष व्यवस्था


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