खरीदें। यहां पर पूरी जानकारी देना असंभव है, परंतु यदि किसी को इसमें रूचि हो तो वह अंदमान के चीफ कमिश्नर के पते पर लिखकर जानकारी प्राप्त कर सकता है। इधर बित्तो भर टुकड़े के लिए उच्च न्यायलय के द्वार खटखटाकर विवाद के पचड़े में पड़ने की बजाय उधर एकड़ों में भूमि नाममात्र के मूल्य में उपलब्ध होने पर भी उसे प्राप्त करने का प्रयास न करना कूपमंडूकता नहीं तो और क्या है? परंतु क्या किया जाए! यह बित्तो भर टुकड़ा पूर्वजों द्वारा अर्जित है न? ऐसे घरघुसे अभिमानी लोग एक पते की बात पर गौर करें कि ‘यह मेरी पूर्वजों द्वारा अर्जित संपत्तिा है’ ऐसी गर्वोक्ति करने से अधिक श्रेयस्कर है यह कहना कि ‘यह मरेी अपनी कमाई है, न कि बाप की कमाई’। भगवान् और देश इसी से प्रसन्न होंगे।
अंदमान के बंदियों की बसाहत बंद करने तक हिंदुस्थानी कौंसिलों में अंदमान संबंधी बहुत चर्चा की
टाट और कंबल का बिस्तर, जिसे उस टाट के खुदरेपन तथा कठोरता के कारण लपेटना कठिन हो रहा था और एक हाथ में टीन के ‘थाली पाट’। पुनः वह टोली एक पंक्ति में तालबद्व बेड़ियां झनझनाती हुई चली। जो कोई भी दिखे, उसे ‘राम-राम, चले भैया कालापानी’ कहते हुए राम-राम का आदान-प्रदान करती हुई वह टोली चल रही थी।
जेल के द्वार पर आते ही वह टोली बाहर निकली। सिपाहियों का बंदूक ताने पहरा सज्ज हो गया और उस पंक्ति को लेकर आगे बढ़ गया। स्टेशन तक वे