और विशेषतः सम्मिश्र संतति की पढ़ाई और उन्हें सरकारी नौकरी देने का प्रयास किया जा रहा है। सुना है, एक-दो महिलाएं सेवा-टहल का काम-काज सीखकर धाय भी बनी हैं। अंदमान के चीफ कमिश्नरों में से एक की स्त्री के लिए इसी प्रकार एक जावरा महिला को सहचरी के रूप में नियुक्त किया गया था।
हम कह सकते हैं कि अंदमान का अर्वाचीन सुसंगत इतिहास साधारणतः सन् 1776 से आरंभ होता है। इससे पूर्व सिंगापुर, पेनांग, मलक्का, टेनासेरीम आदि द्वीपों तथा स्ािलों से कालेपानी का दंड प्राप्त लोगों को निर्वासित किया जाता था। इंजीनियर कोलबु्रक तथा कैप्टन ब्लेअर जैसे दो उद्योगी अंगे्रजों ने सन् 1776 की संधि में अंदमान
में उपनिवेश प्रस्थापित करने का प्रयास किया। उससे पूर्व कई बार अंगे्रजों की नौकाएं भटककर इस द्वीप के किनारे आ लगी थी। उनके भयंकर वर्णन आज भी पढ़ने को मिलते हैं। कैप्टन ब्लेअर ने जब
भी अब सो जाओ।’’ यह कहते ही उन सिपाहियों ने उनसे कहा, ‘‘बालिस्टर साब को नींद नहीं आ रही है, अतः तुम भी अब सो जाओ।’’ यह कहते ही उन बंदियों में से प्रायः सभी बंदियों ने चीखना-चिल्लाना बंद किया और फिर लगभग बारह बजे रात मेरी आंख लग गई।
प्रातः का स्मरण हो आया कि मेरे ज्येष्ठ बंधु बाबाराव जब आजन्म कारावास’¹ पर गए, तब वे इसी तरह के किसी चालान के साथ गए होंगे और उससे पहले यहीं-कहीं उन्हें बंद रखा गया होगा। अतः वाॅर्डर से पूछा, पर वह