चीनी, तंबाकू लेकर उन वस्तुओं को बेचना- दो-चार निकटवर्ती इमारतों में, जो उनके लिए ही बनवाई गई थी, रहते हुए और पुनः इस अभेद्य आरण्यक निबिड़ता में घुसकर अदृश्य हो जाना। वे जंगल से शहद लाकर उसे बेचते थे। इन सभी वस्तुओं को वहां से इकट्ठा करके सरकार उन्हें विदेश भेजती है। वहां के शंखों को ठीक तरह से घिसकर ऊपर से चंादी अथवा सुवर्ण की गढ़न के साथ भारी मोल लेकर उन्हें बेचा जाता। ये हिले हुए लोग अब एक छोटी सी लंगोटी पहनने लगे हैं। उनकी स्त्रियां एकाध पत्ता अथवा पर्णमाला कटि में लपेटती है। उपनिवेशीय लोगों से निकट संबंध हो जाने से उनमें एक मिश्रित संतति उत्पन्न होने लगी है। कभी-कभी गोरे सिपाही अथवा यूरोपियन व्यक्ति के संपर्क से उत्पन्न जावरा स्त्रियों की संतान गोरी और भारतीय पुरूषों के संसर्ग से उत्पन्न साॅंवली अथवा गेहुंॅआ वर्णीय दिखाई देती है। उनमें से कुछ युवक-युवतियां


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रहा। भले ही व्यक्तिगत दुःख से मन व्याकुल हो, तथापि उस गड़बड़झाले में मन अपना


दुःख-दर्द भूलकर घड़ी भर के लिए वह तमाशा देखे बिना अन्य कुछ कर भी नहीं सकता, इतना उन लोगों के ठहाकों का शोर हो रहा था। मंैने उसमें प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं लिया तथा चालान ने यह कहते हुए उसकी अपेक्षा की कि ‘बालिस्टर साहब को तंग मत करो।’ इतना ही नहीं,ग्यारह बजे रात को जब उनका हंगामा शिखर पर पहुंच गया तब सिपाहियों ने उनसे कहा,‘‘साब को नींद नहीं आ रही है, अतः तुम


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