सादगीयुक्त जीवन का डंका बजाते रहते हैं, लंगोटी पहनने का मोह होता ही है, जावरों को तो उतना भी मोह नहीं होता। बड़े निर्मोही हैं वे।
परंतु क्या इस कारण वे असंतुष्ट हैं? कदापि नहीं। काश्तकारी नहीं, हल नहीं बैंकों में पैसा नहीं- न सही; परंतु जो किसी ऊबड़-खाबड़ गढ़ी-गुफा में पनाह अथवा मांस का टुकड़ा अस्थायी अग्रधिकारवश किसी जावरे के पास हो, उस पर दूसरे की निगाह न पड़े अथवा पड़ते ही जो सावधानी बरतनी अथवा चिंता करनी पड़ती है, व्यवस्था करनी पड़ती है, आवश्यकता पड़ने पर डटकर टक्कर देनी पड़ती है, यह सब उसके लिए उतना ही उत्कट और भयंकर होता है जितना किसी कैसर या जार के लिए। आपको और हमें खेती की जितनी चिंता करनी पड़ती है, उससे अधिक चिंता और कष्ट जावरा लोगों को वन्य फल की खोज और उसके अभाव में सुअर के शिकार अथवा मच्छीमारी में भुगतने पड़ते हैं।
चक्रं नानुवर्तयतीह यः। अघायुरिद्रिंयारामो मोघं पार्थ स जीवति।।’ इस तरह उदात्त बुद्वि से वे सारे लोग दस-बारह बजे तक उस नीच कर्तव्य को निभाने का प्रयास करते रहे। चालान के इस संस्थागत अभिमान के सामने क्या सिपाही, क्या सुपरिटेंडेंट सभी अपना सारा बड़प्पन ताक पर रखकर गुपचुप तमाकू लो, चिल्लाओ, बात करो, पर आपस में धीमी आवाज में और किसी प्रकार ठाणे के इस कारागृह से भाग न जाएं, यह सावधानी रखते हुए। पुलिस अफसरों को उतने ही बंदी गिन दिए, जितने लिए थे