अंदमान और हिंदुस्थान
इस द्वीपमाला का उल्लेख मार्कोपोलो और निकोलो आदि यूरोपियन तथा कुछ अरबी सैलानियों के प्राचीन लेखों में उपलब्ध है। परंतु इस द्वीप से हिंदुस्थान का संबंध अति प्राचीनकाल से अवश्य रहा होगा। मगध देश से श्रीलंका की ओर अनेक समुद्री यात्राएं होने के वर्णन इतिहास में उपलब्ध हैं और उसी तरह आंध्र, तमिल आदि दक्षिणी लोगों के ब्रह्मदेश, स्याम, पेगू, जावा आदि देशों पर राजनीतिक आक्रमण होने के जो वर्णन मिलते हैं, उससे स्पष्ट दिखाई देता है कि भारतीय सागर-यात्री इस द्वीप से भलीभांति परिचित थे। इस द्वीप का स्पष्ट नाम-निर्देश ग्यारहवीं सदी में पांड्य राजाओं के आक्रमण के वर्णन में मिलता है। इस सागर विजेता वीर ने पेगू पर आक्रमण करके उसपर विजय प्राप्त की और अपनी उस विजयी सेना को वापस लाते समय अंदमान और निकोबार- इन दो द्वीपों पर अपना अधिकार प्रस्थापित करके फिर अपने
की बोतलें गटकते हुए वे नशे मंे झूम-झूमकर चल रहे थे। कोई सिंध का, कोई धारवाड़ का, कोई कोंकण का, कोई गुजरात का निवासी। उनकी विभिन्न भाषाएं भले ही उनके मनोविचार तथा मनोविकार को पूरी तरह अभिव्यक्त करने मंे रहने का अवसर पाकर सामाजिक आनंद में क्षण भर को मग्न हो गया था। सांझ की वेला अर्थात् इस विद्रोह हेतू उठी बीभत्स भावनाओं तथा विनोद के नंगे नाच की वेला। हर कोठरी से चीखने-चिल्लाने, गाली-गलौज, ठहाकों, अनुच्चारणीय शब्दों का जी भरकर उच्चार आदि बातों की