जो साधारण बंदी के शरीर पर होते हैं। इन वस्त्रों में बैरिस्टर कैसे लगते हैं-इस कौतूहल से बहुतेरे और वास्तविक संवेदना से थोड़े अनेक लोग रूग्णालय से, रास्ते से, खिड़कियों से, किसी-न-किसी काम के बहाने वहां आते जाते मुझे देख रहे थे। डोंगरी का कारागृह मध्य बस्ती में है- ऐसा लगता है, क्यांेकि आस-पास थोड़ी दूर पर ऊंची ऊंची इमारतें तािा घर दिखाई देते हैं। उधर व्यायाम करते समय उन इमारतों और खिड़कियों के पास स्त्री-पुरूशों की भीड़ लग जाती और वे तब तक आपस में खुसर-पुसर करते रहते जब तक मैं अपना व्यायाम समाप्त कर वहां से चला नहीं जाता। पुलिस का आंख बचाकर मैं भी कभी कभी उनके प्रणाम स्वीकार कर प्रति-प्रणाम करता। मन में उनका वह पूज्यभाव देखकर कभी अच्छा लगता, पर कभी ं ं ं ं ऐसे विचार आते। एक दिन मुझे सामने के घर के एक निवासी को पुलिस द्वारा धमकाने का समाचार मिला।


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ने कहा है कि ’अंगे्रजों को आपको फ्रांस के हाथों सौंपना ही चाहि,ए था।’ ऐसा कठोर निर्णय नहीं दिया जा सकता है।’’ मुझे ं ं ं ं ं ं ंने कहा।

’’ठीक है, मैं कभी हेग के भरोसे रहा ही नहीं था। परंतु क्या मुझे हेग का निर्णय देखने को मिलेगा?’’

’’यह मेरे वश में नहीं है। आपके लिए जो संभव है, वह मैं करूंगा। फिर भी हम अजनबियों को भी विह्नल करनेवाला समाचार आपने जिस धीरज से सुना, वह मेरी सहायता पर निर्भर रहेगा, ऐसा नहीं लगता।’’ वे सज्जन छअपटाते हुए


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