फंेक रहा है और उघर छोटी-बड़ी जोंकों के झुंड ऊपर से कूदकर या नीचे से चढ़कर अथवा आजू-बाजू से आकर चिपकते जाते हैं।
इन जंगलों में भयंकर साॅंप की तरह के गिरगिटों का भी, जो जोंकों की तरह ही नहीं अपतिु उनसे भी घातक होते हैं।-बसेरा होताा है। ये एक हाथ लंबे तथा एक इंच से मोटे विषैले होते हैं कि उनके डसने से मनुष्य को लकवा मार जाता है और भाषण वेदना हुए बिना नहीं रहती। यहां साॅंप बहुत ही कम हैं, तथापि ‘वाइपर’ नामक अत्यंत विषैला एक छोटा सा-साॅंप मिलता है, कभी-कभी अजगर भी मिलते हैं। सदियों से इन जंगलों में किसी भी मनुष्य का अधिक प्रवेश न होने के कारण इन सब प्राणियों की अत्यधिक वृद्वि होती रही है, जो परस्पर भक्षण की मर्यादा से ही कदाचित् कुंठित होती होगी। इन जंगलों में बाघ, शेर, रीछ आदि खूंखार पशु नहीं पाए जाते । जंगली सुअर मिलते हैं। पक्षियों
उन्मुक्त हास्य
पिछले महायुद्व में भी यही अनुभव हुआ। जर्मन पनडुब्बियों के अधिकारियों तथा नाविकों को युद्व में सभी सैनिकों से अधिक कष्टप्रद तथा मारक सेवा करनी पड़ी। उन्हें तत्काल अपने प्राण हथेली पर लेकर सागर में गोते लगाने पड़ते और समुद्र के गर्भ में पल-पल मृत्यु की अपेक्षा करते मारने का काम करना पड़ता। उस भयप्रद अनिश्चित के धूम-धड़ाके में कभी-कभी ये पनडुब्बियां किसी तटीय शहर में आकर विश्राम
करतीं, तब उतने से अल्प काल में भोग-विलास के लिए जो विहारालय