पर एक भी नहीं है, पर जगह-जगह पहाड़ों से कलकल कर बहते झरने विपुल मात्रा में हैं।

मलेरिया का प्रादुर्भाव

इस इलाके में घने जंगलों के कारण प्राचीन काल में वर्षा की अविरल झड़ियांॅ लगी रहती थी। ग्रीष्म ऋतु में भी रिमझिम-रिमझिम होती ही रहती, तथापि जिसे-सिजस भाग में जंगल की कटाई होकर बस्ती बन गई है और भूमि को थोड़ा साफ करके जोतकर खेती और नारियल के बगीचे लगाए गए हैं-उस ओर ऋतुमान लगभग हिंदुस्थान के उष्ण इलाकों जैसा हो रहा है। वर्षा और ग्रीष्म-यही दो ऋतुएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, शीत या जोड़े का मौसम बस झांकता हुआ निकल जाता है। इस द्वीप के चारों ओर से ही नहीं अपितु प्रत्येक दो टुकड़ों के बीच में से भी समुद्र के घुसे होने और इन द्वीपों के लंबाई तथा चैड़ाई में छोटे होने के कारण यहां-वहां खाड़ियां और दलदल का साम्राज्य फेला हुआ है। इन खाड़ियों के जल


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भेजने की पात्रता निश्चित की गई। बगल में बोरिया-बिस्तर, हाथ में बरतन-बेंड़िया झनझनाते हुए मेरा भी जुलूस निकाला गया। मैं भी उस परकोटे के द्वार के भीतर घुस गया। उस द्वार की देहरी पर कालेपानी के सिंहद्वार की देहरी थी। मैंने उसे पार किया, हिंदुस्थान से नाता टूट गया। अंदमान के लिए मेा प्रस्थान हुआ।


प्रकरण-4

अंदमान के लिए प्रस्थान

ठाणे के कारागृह में केवल अंदमान काा चालान बंद करने के लिए ही जो स्वतंत्र परकोटे का भाग था, उसमें अर्थात् अंदमान के उस द्वार


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