जिन-जिन नूतन भूखंडों पर अपना आधिपत्य फेलाती जा रही है, उसमें अंदमान द्वीपपुंज की गणना करना अत्यावश्यक है।
यह द्वीप कलकत्ता से लगभग छह सौ मील की दूरी पर है। बीच में छोटे-छोटे द्वीपपुंज, थोड़ा सागर, पुनः द्वीपपुंज -इस क्रम से यह एक द्वीपमाला बंगाल के उपसागर में बिखरी हुई है। उसमें अंदमान सबसे बड़ा द्वीप है। वह तीन भागों में विभाजित है। इनको उत्तर अंदमान, मध्य अंदमान और दक्षिण अदंमान की सज्ञाएं दी गई हैं। इस द्वीप के मानचित्र में दी हुई आकृति देखकर यह स्पष्ट होता है कि उसका नाम अंदमान क्यों पड़ा। इस नाम की हनुमान शब्द से हुई व्युत्पत्तिा हमने सुनी है, परंतु अंडाकृति होने के कारण इसका अंदमान नाम हमें संभवनीय प्रतीत होता है। उत्तर अंदमान की लंबाई क्यावन मील (मील=दूरीसूचक शब्द है, जिसे अब किलोमीटर कहा जाता है), मध्य अंदमान की लंबाई उनसठ मील
हुए थे। सिपाही भी किसी के जरा सी ‘चूं’ करते ही बरस पड़ते, ‘ऐ क्या बात है, कायदे से चलो,‘ मानो इस बात से सर्वथा अनभिज्ञ थे कि एक क्षण पहले इधर कैसा घपला मचा था। अब तक बंदियों से अधिक सिपाहियों का जो भीड़-भड़क्का तथा ठेला- ठेली चल रही थी, वह सब जैसे ‘कायदे’ से या विधिवत् चल रही थी।
परोपकारी अधिकारी
दूसरे दिन यह निश्चित हुआ कि कालेपानी भेजने के लिए हमारा स्वास्थ्य, आयु आदि अनुकूल है या नहीं, इसकी वैद्यकीय जांच हो जाए। एक परोपकारी