से उसे मारकर इस तरह तुम जैसे मच्छर-मनुष्य का साहस है यह। यह प्रचंड सामुद्रिक शक्ति जब खौलने लगेगी तो अपनी लहर की एक बंूद की फुहार पर तुम्हारी यह नैया ही नहीं अपितू पूरा-का-पूरा महाद्वीप ही उठाकर उसे खंड-खंड कर सुपारी जैसा सटक जाएगा। तब किसी को पता भी नहीं चलेगा कि यहां पर कभी एशिया महाद्वीप था या नहीं। कितना ‘यः कश्चित्’ है मानव-‘यः
कश्चित्’ मनुष्य के बीच मैं कितना ‘यत्किंचित्कर’ हो गया हूं!! आज इन अधम, नीच तथा दुष्ट दंडितों, जो अपना शरीर समेटकर बैठे हैं, की पंक्ति में एक उपेक्षित कोने में मैं भी अपना शरीर समेटकर उकड़ूॅं बैठा हूॅं। हाथों में हथकड़ी, पाॅंवों में बड़ियांॅ- इतना श्रुद्र, तुच्छ बन गया हूं कि इस जहाज के झाड़ूवाले भी मेरी ओर सहानुभूतिपूर्वक संकेत करके ‘बालिस्टर बाबू’ कहते हुए दया करते हैं। ये सेवक भी, जो पानी डालकर लकड़ियांॅ धो
काम दिलवाऊंगा आदि, जो जी में आए सो नाम लेकर गप्पें हांकता, और अपनी भोगेच्छार्थ उनके भोलेपन की बलि चढ़ाता।
बहन की हत्या
देखो, वह लड़का, अभी मूंछें भी नहीं भीगी, अठारह-उन्नीस की आयु! भंगेड़ियां की संगत में एक दिन भंग के नशे में अपनी बहन को इसलिए चाकू घोंप दिया कि उसने गाली दी। वह तो उसी समय ढेर हो गई और यह अब डरते, सहमते बिछौने के बोझ तले झुकती कमर के साथ तथा बेड़ियां उठाए न उठने के कारण लंगड़ाते-लंगड़ाते, घिसटता चल रहा है।