है। यह मानव की जड़ सृष्टि पर प्राप्त कितनी बड़ी विजय है, कैसे कहें! एक दिन यही सूरज उस नूतन विजय की ओर, जो मनुष्य ने अपने मन पर प्राप्त की है, इसी तरह भौंचक्का होकर पृथ्वी की ओर देखता रहेगा। मनुष्य भी मन में विराजमान उस राक्षस पर विजय प्राप्त कर, पीड़क और पीड़ित को एक-दूसरे से छेदकर और अपने पैरों में पड़ी दासता की बेड़ियां तोड़कर मुक्त हो गया है, तथापि वह प्रेमपाश से परस्पर बंध गया है-हां, एक समय ऐसा भी आएगा-ऐसा ध्न्य दिवस न जाने कब उदित होगा जब यह सूर्य इस नूतन विजय से प्रमुदित होकर वसुंधरा की ओर इसी तरह देखता रहेगा। मानवजाति की स्वतंत्रता केवल मनुष्य मात्र के प्रेम की ही दासी रहेेगी। इस धन्य दिवस पर धन्य उन समस्त भुक्त-कष्टों तथा हुतात्माओं के कष्ट भोग तथा हौतात्म्य सफल होंगे, जिन्होंने यह धन्य दिन लाने के लिए आत्म-बलिदान किया है।
यह रिपोर्ट देकर अपने हाथ झाड़ लिऐ कि वह लड़का काम करते समय किसी कगार से गिर पड़ा। कालेपानी पर मेरी जमादारी पक्की है-वहां तो बस जाने भर की देरी है- मैं जमादार बना। फलाने साहब, अमुक साहब, इस प्रकार बड़े-बड़े नाम लेकर उसने नवागत बंदियों को चकित कर दिया। उनमें से जो कुछ कम आयु के थे और जिनकी छाती में अभी तक ह्नदय नामक कोई चीज धड़क रही थी और कालेपानी जैसे दंड से लज्जित थे, इसी तरह कुछ अन्य बंदी, जिन्हें इस बात की चिंता थी कि आगे