कुछ और चर्चा के बाद चला गया। सब लोग चले गए। मैं नीचे बैठा शेश रहे हम दोनों-मैं और मेरा दंड। अकेले उस उदास कोठरी में एक-दूसरे का सामना करते हुए, एक-दूसरे का मुंह देखते हुए।
इसके आगे उस दिन की कहानी तथा ह्नदय में मची खलबचली हमने ’सप्तर्शि¹
कविता के पूर्वार्ध में उसी पुस्तक में प्रकाशित की है।
दूसरा दिन
’’ पौ फट गई है।’’ जमादर ने आकर कहा,’’ यद्यपि आपकी सजा प्रारंभ हो गई है तथापि आपको पूर्व की भांति ही प्रातः व्यायाम के लिए सैर करने नीचे लाया जाए, साहब ने कहा है।’’
मैं व्यायाम के लिए नीचे उतरा तो इधर मेरी कोठरी की खोज-खोजकर तलाशी ली गई। मेरी पुस्तकें तथा मेरा सम्मान नीचे ले जाया गया। सिपाहियों के पहरे में डोंगरी जेल के मध्य चैक में मैं धीरे धीरे टहल रहा था। अब मेरे बैरिस्टरी वस्त्रों के स्ािान पर वे खुरदरे मोटे वस्त्र थे
नहीं है, फिर भी जो कुछ बताया जाएगा उसे अक्षरशः तथा भावार्थशः यथातथ्य बताने का यत्न अवश्य किया जाएगा। इस ग्रंथ में विचारों, भावनाओं तथा घटनाओं का जो वर्णन आएगा, वह सब उस समय उद्भूत विचार-भावनाओं का निदर्शक होगा और आज उसे मात्र ऐतिहासिक रूप में ही पढ़ा जाए, ऐसी लेखक की इच्छा है।
- वि. दा. सावरकर
पूर्वार्ध
प्रकरण -1
बंबई स्थित डोंगरी का कारागृह
“आप पर पचास वर्ष के दंड काले पानी का दंड लागू हो गया है हेग¹ के अंतर्राश्ट्रीय न्यायलय