करते, तब सिपाही क्रोधित हो कहते, ‘अरे ठहर तू, बड़ी चढ़ी हुई है तुझे, समझता है तू ही सबसे बड़ा बदमाश है। अगर एक बार बारी बाबा को देखा तो सारा होश ठिकाने आ जाएगा- अरे धोती ढीली हो जाएगी, धोती में मूतोगे, समझे!’ बारी बाबा और हमारी शीघ्र ही गहरी मैत्री होनेवाली थी, अतः उन सिपाहियों को उस संबंध में अधिक कुरेदने में कोई तुक नहीं था।
अंदमान के संबंध में वे कहते, ‘बाबूजी, छह महीने में मुक्ति मिलेगी। आप जैसे पढ़े-लिखे बाबुओं को तो आॅफिस में काम मिलेगा। इतना ही नहीं, पूरा जिला आपकी आज्ञा में रहेगा। दस वर्षों तक सहÛों रूपए जुटा सकोगे और दस वर्षों के पश्चात् घरबार बसा लोगे। ’ मन-ही-मन मैं सोचता, ‘यह क्या! भई, कहीं मुझे क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के उपलक्ष्य में पुरस्कृत करने के लिए तो अंदमान नहीं ले जा रहे हैं। चलो, अच्छा ही हुआ जो मार्सेलिस में
आ गया। कोई अत्यंत उग्र, कोई चट्टान सदृश कठोर, कोई भयंकर खूंखार, कोई बलवान, कोई काला कलूटा, बीच-बीच में कहीं दर्शनीय- इस तरह विभिन्न स्वरूप तथा मुद्रा के वे मानव प्राणी। कोई छाती तानकर अकड़ रहा है, कोई दनदनाता हुआ चल रहा है, जैसे कोई महान् पराक्रम करके आ रहा हो, कोई इस तरह हेकड़ी जता रहा है जैसे:नमयतीव गतिर्धरित्रीम्’, तो कोई दुःख भार से शीश झुकाए लज्जा के मारे पानी-पानी होकर घबराते हुए इधर-उधर देखता हुआ। सिपाहियों के नियंत्रण में