कि आप हमारे साथ आए। कितना अच्छा हुआ!’’ तब मैं हंसते हुए कहता,‘‘ तो फिर यह अच्छा ही हुआ न कि मुझे दंड मिला।’’
उधर दिन-रात उन बंदियों में मेरी चर्चा छिड़ती और मेरी चर्चा छिड़ते ही, हिंदुस्थान अपना स्वदेश है ं ं ंउसे ं ं ं आदि उस कार्य के संबंध में भी जिसका भार मैंने उठाया था- भरपूर चर्चा होती। यदि कोई तिलमिलाकर मुझसे कहता, ’कैसे कहें, पर आपको देखकर कलेजा टूक-टूक हो जाता है ं ं ं ’तो मैं मुस्कुराकर कहता, ‘अभी-अभी तो आप कह रहे थे कि ऐसा होना चाहिए, और हिंदुस्थान ं ं ं ंमें आदि चर्चा कर रहे थे न? फिर आपने इस बात पर गौर नहीं किया कि एक मैं ही क्यों? इस तरह मेरे जैसे बंदियों से सैकड़ों जहाज भर-भरकर कालेपानी जाएंगे। जो करेगा सो भरेगा। जो भरेगा सो करेगा ं ं ं।’
जहाज के अधिकारी से लेकर सिपाही-संतरी तक और बंदियों से लेकर खलासियों तक
को झाड़-बुहारकर साफ करने में, राशन-पानी के नाप-तौल का प्रबंध करने में, कपड़ों की गिनती में तथा अन्य ढेर सारे प्रबंधों की उतावली में आधे से अधिक बंदी व्यस्त थे और शेष आधे बंदी उनकी उस धांधली तथा त्वरित निरीक्षण में अपनी उतावली में व्यस्त थे।
चालान आ गया
तीन बज रहे थे। प्रत्येक व्यक्ति अपने निकटवर्ती बंदी से आतुरता से पूछता, ‘‘अरे, अभी तक’ ‘चालान’ क्यों नहीं आया?’’ इतने में कारागार के द्वार से बंदियों में से कुछ लोग अचानक इधर-उधर मुड़ते हुए दिखाई