प्रति बहुत आदरभाव प्रदर्शित किया। कुछ अंगे्रजी वृत्तपत्र, पत्रिकाएं भी प्राप्त हो गई। जहाज पर खाने के लिए केवल भुने हुए चने मिलते थे। परंतु कुछ अधिकारियों ने अनुरोध किया कि मैं कुछ खाने के लिए ले लूं। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या मांगू? और मुझे अकेले को देना भी कठिन था। अंत में कुछ उदार व्यापारियों ने कप्तान की आज्ञा प्राप्त करके सभी बंदियों के लिए भात, मछली और अचार आादि व्यंजन तैयार करवाए। मेरे कारण दो दिन के अनशन के पश्चात् ऐसा भोजन प्राप्त हुआ जो कभी नहीं मिलता था, इसलिए सभी बंदी बांसों उछल पड़े। मेरे साथ ही उन्हें घंटा-आधे घंटे के लिए उस घुटन भरे तंग तलमंजिले पिंजरे से निकालकर हवाखोरी के लिए ऊपर के तल्ले पर जब लाया जाता तब साधारण व्यवस्था से अधिक व्यवस्था तथा सुविधापूर्वक व्यवहार किया जाता। इसक संबंध में वे दंडित मुझसे कहते, ‘‘बाबूजी, हमारा अहोभाग्य


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प्रत्येक बंदी के प्राण इस उकताहट भरे, नीरस जीवन के पंेच से, किसी भी बहाने से क्यों न हो, मुक्ति पाने के लिए घुल-घुलकर कांटा बनते हैं। चाहे किसी कौए का उड़ते-उड़ते एकाध पर गिर पड़े या एक चिड़िया को दूसरी चिड़िया मारने लगे- कोई भी नई, साधारण सी घटना एस उकताहट भरे जीवन में तनिक मनोंरजन का कारण बनती है, उसमें रंग भरती है और फिर आज तो ‘चालान’ के लिए पूर्ववर्ती परकोटे की एक भीत की ओट में स्वतंत्र कोठरियों का एक रिक्त हिस्सा आरक्षित था। एस दालान


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