छोड़ते और उनके उस परस्पर संग्राम की हाथापाई देखते-देखते मुझे भी बड़ा आनंद आने लगा। अन्न की विष्ठा, विष्ठा का खाद और खाद पुनः अन्न। भई वाह! चमत्कार है! ठस आनंद में गंदगी का उपद्रव दूर हो गया। रात एक बजे के आस-पास गहरी नींद सो गया। उस जलायन पर इस तरह मेरा उस कोने में अविचल रहना सभी बंदियों के लिए आश्चर्य का कारण बन गया। एक-दो जनों ने तो मेरी पीठ पीछे यह संदेह भी व्यक्त किया कि मैं किसी नीच जाति का गंदा, घिनौना व्यक्ति हूं, जिसके शरीर से पसीने की दुर्गंध आती है।
यूरोपियनों का व्यवहार
उस जहाज के यात्रियों तथा कुछ भारतीय अधिकारियों की हार्दिक इच्छा रहती थी कि मेरी कुछ-न-कुछ सहायता करके अपनी आदरभावना व्यक्त करें, जो उनके मन में मेरे लिए पनप रही थी। आते-जाते वे यथासंभव मुझसे मिलकर जाते। यूरोपियन लोेगों में कुछ संतरियों ने भी मेरे
के भयंकर असली बदमाश सिद्व होते हैं, के झुंड को अंदमान भेजने के लिए कुछ दिन तक रखा जाता है। उनके इस अगली यात्रा के लिए होने वाले आगमन को ही हम बंदियों की परिभाषा में ‘चालान’ कहा जाता है। नामी चोर, निर्दयी, खतरनाक डाकू, नृशंस हत्यारे, आग लगानेवाले, उग्र अपराधियों में भी भयानक समझे जानेवाले आदि तमाम
‘सज्जनों’ का समूह आज ठाणे के कारागार में पधार रहा था।
बंदीशाला में इस मेले के आने का दिवस बहुतों को एक उत्सव का दिन प्रतीत होता है; क्यांेकि