करते हैं? गोबर क्यों नहीं खाते?’’ इस पर त्रैलिंग स्वामी हंसे और वहीं पर शौच करके, जब तक लोग सफाई को आते, देखते-देखते उसे खा गए।
रामकृष्ण परमहंस
रामकृष्ण परमहंस के विषय में भी इसी तरह की आख्यायिका है। अपनी अद्वैतानुभूति के सारे साधन समाप्त होने के पश्चात् एक अंतिम कठिन साधना के रूप में कलकत्ता में वे उस स्ािान पर गए जहां मैला डाला जाता है। वहां पड़ी विष्ठा को अपने हाथों से उलट-पुलट करते हुए उन्होंने पांच काड़़ी भरकर विष्ठा मुंह में डाल ली। और एक तू ही कि इन दंडितों के विष्ठा करते समय उस दुर्गंध से डरकर उस गंदगी भरे पीपे से दूर भागना चाहता है। अन्य लोगों की विष्ठा के पीपे से चाहे कितना भी दूर भागो, तथापि उसका क्या करोगे जो तुम्हें अपनी विष्ठा का पीपा अपनी ही पीठ पर ढोना पड़ता है? तुम उसे लाख वस्त्रों की आड़ में छिपा लो तथापि ढकने से भी वह
इससे अच्छा है, यदि आप नीलामी में बोली लगाएंगे तो कपडे़ तथा सामान आपके बाल-बच्चों के काम आएगा। मैं समझूंगा ये वस्तुए सद्कार्य में आ गई। इस तरह मैंने उन सज्जन सिपाहियों को समझाने का प्रयास किया। दूसरे दिन उपनेत्र और गीता मुझे वापस लौटाई गई, परंतु मेरी कहकर नहीं, बंदियों को दिया जानेवाला सरकारी सामान कहकर।
अंदमान का चालान
आज काागृह में जहां देखो वहां एक ही गड़बड़ मची हुई थी। आज अंदमान का चालान आनेवाला था। चालान हमारे काराशास्त्र का एक पारिभाषिक