तंग स्थान पर जाते ही सांस लेना दूभर हो जाता, छाती में दर्द होने लगता और दम घुटने लगता। अतः मैंने उस गोरे अधिकारी को, जो मेरे साथ था, बताया कि इस प्रकार के तंग व घुटन भरे स्ािान पर मुझे रखने से गड़बड़ हो सकती है। उसने जहाज के डाॅक्टर को सूचित किया। उसने कहा, ‘फिलहाल तो इधर ही रहो, स्वास्थ्य खराब होने पर देखा जाएगा। और विशेष सुविधा के तौर पर मुझे उस पिंजरे में न रखते हुए मेरा बिछौना एक कोने में, जहां जहाज का छेद था, उसके सामने सीखचों के पास डालने का आदेश दिया। आगे शीघ्र ही ज्ञात होगा कि इस विशेष सुविधा का मुझे क्या लाभ हुआ।
इतने में एक और सज्जन आ गए, उन्होंने मार्सेलिस की बात छेड़ी। मैंने भी खुलकर थोड़ी चर्चा की। ‘‘आपसे मिलने हम हेतुपूर्वक आए थे। ईश्वर आपको वापस स्वदेश ले आए, यही हमारी हार्दिक कामना है।’’ इतना कहते हुए
के तमाशे से तुम्हारा क्या बिगड़ता है? तुमसे पहले यह कांटों का ताज उन्हें भी धारण करना पड़ा जो अपने आपको पे्रषित कहलाया करते थे। आज द्वीप-द्वीपांतर जिनके चरणों पर अपने शीश झुका रहे हैं, तुमसे पहले कारागार के बंदियों ने उनकी दुर्गति की थी। इस तरह विवके के साथ मैं उस व्यक्ति का व्यवहार सहता रहा। आज सोलह वर्ष बीत चुके थे, पंरतु अभी तक मैं
निश्चित रूप में यह नहीं कह सकता कि उस मनुष्य को जैसे कि कुछ बंदियों का कहना था- मुझे मानसिक यातनाएं दिलाकर