भी उनमें सम्मिलित नहीं थे।’’ मैंने हंसकर कहा,‘‘तो आप ही कुछ लोगों को इकट्ठा करते।’’
‘‘अरे, कैसी बात करते हैं। इस मद्रास इलाके के लोग बड़े शिष्ट और विवेकशील हैं, न कि आपके इलाके के नवयुवकों के समान छिछले। इधर कोई प्रचारक आ भी गया तो उसे एक भी अनुयायी नहीं मिलेगा।’’ यह बात करते समय पग-पग पर उनका लक्ष्य इस पर केंद्रित था कि मैं उनका प्रतिरोध करने के लिए मद्रास के कुछ नामचीन क्रांतिकारियों के नाम तो नहीं उगलने लगा। बाद में स्वयं ही कहने लगे,‘‘आपका अनुभव कैसा रहा?’’ मैंने कहा, ‘‘मुझसे अधिक आप लोगों को मद्रास का अनुभव रहा होगा।’’उन्होंने कहा,‘‘मैंने तो मद्रास में सर्वत्र शांति ही देखी।’’ मैंने स्मित करते हुए कहा,‘‘ठीक है न! आप विश्वासपूर्वक कहते हैं कि इधर हर कहीं शांति है?’’ वह समझ गया। वह दूसरा अधिकारी भी मुसकराया।
क्या दंड दिलवा दे। उनके हंसने पर वह और छाती फुलाकर कहता, अरे, हंसते क्यों हो? क्या हवा को मारने का यह साहस हमारे इन महाराज के साहस से अधिक हास्यास्पद है, जो आठ-दस लड़के लेकर अंगे्रज सरकार को मारने चले हैं?
विलायती छैल-छबीली
कभी हम स्नान करते तो वह वहीं खड़े होकर हमारी ओर घूरता रहता और अपने मातहत सिपाहियों से कहता, ‘गोंद्या, तनिक देखो तो हमारे दादा की देह! जैसे सोने का टुकड़ा। भुजाओं का गठाव, यह चैड़ी छाती! दादा कुश्ती करते थे,