सिर पर अति गंभीर आरोपों के वाॅरेंट लिए हिंदुस्थान की सीमाओं पर कड़ी गुप्तचर व्यवस्था के बावजुद हिंदुस्थान में पांडिचेरी में आ धमके थे। अंदमान में सात-आठ वर्ष गुजारने के बाद सीक्रेट रिपोर्ट पढ़कर मुझे ज्ञात हुआ कि पुलिस अधिकारियों की यह कल्पना थी कि वहां से उन्होंने ‘अभिनव भारत’ की शाखा की सहायता से उसके सदस्यों में से एक शाक्त ब्राह्मण के हाथों तूतीकोरिन के कलेक्टर की गोली मारकर हत्या करवाई थी, पर उस समय यह भी मुझे ज्ञात नहीं था कि श्री अय्यर वापस लौट आए हैं।

मद्रास के उस कलेक्टर की हत्या का समाचार मुझे प्राप्त हो चुका था और बस इतना ही सत्य है कि मुझे यह संदेह था कि प्रायः मद्रास के ‘अभिनव भारत’ के किसी सदस्य द्वारा ही यह कठोर कृत्य संपन्न कराया गया होगा। परंतु इस आशा से कि मुझे


यह समाचार ज्ञात ही नहीं हुआ हो और इसलिए मैं सहजतापूर्वक मद्रास शाखा की कुछ


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या मिथ्या। मेरे प्रति वह दया भाव प्रदर्शित करता था। भोजन यथासंभव ठीक-ठीक देने का प्रयास करते देखकर भी अनदेखी कर लेता, परंतु नियमपूर्वक राजनीतिक चर्चा करके मेरे मन पर यह प्रभाव जमाने का प्रयत्न करता कि मैंने अत्यंत निरर्थक एवं पागलपन का काम करके नादानीपूर्वक जीवनहानि की है। आते-जाते बंदियों को सकारण बुलाकर मुझे दिखाता और उनसे कहता,‘देखो, हमारा सिंहपुरूष हो तो ऐसा! पर क्या? राव अजब तेरी करनी, अजब तेरा खेल! मकड़ी के जाल में फंसाया शेर।’


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