और उन्हें मुझमें इतने सद्गुण दिखाई दिए कि उन्होंने टोपी उतारकर मुझे प्रणाम भी किया।

उसी समय मद्रास में कलेक्टर अशे की हत्या हो चुकी थी। अधिकारियों को संदेह था कि इस हत्या का संबंध यूरोप स्थित‘अभिनव भारत’ के एक नेता से जुड़ा हुआ है। अतः मेरा अनुमान था ही कि इस संबंध में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में मुझसे कुछ-न-कुछ अवश्य पूछा जाएगा। इंग्लैंड में मेरे पकड़े जाने के बाद मुझे हिंदुस्थान में वापस लाया जा रहा था और मेरा प्रकरण समाप्त होने पर मुझे अंदमान ले जाने की व्यवस्था हो रही थी, तब सचमुच ही मैं यह नहीं जानता था कि ‘अभिनव भारत’ के तत्कालीन उपाध्यक्ष श्री अय्यर¹ -हिदंुस्थान में आए थे। इनकी असमय मृत्यु से इस वर्ष समूचा आर्यावर्त विह्मल हो रहा था। मैं इस बात से सचमुच अनभिज्ञ था कि वे हिंदुस्थान आए हुए हैं वे यूरोप से नाना वेशों और विधियों तथा उद्देश्य से यात्रा करते,


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मुझे उसका कुछ भी समाचार नहीं मिला, यूं कहिए कि समाचार मिलने नहीं दिया गया कि वह कहां गया, कब छूटा, क्या करता है।


सिंह-पुरूष

ठाणंे कारागृह के सिपाहियों के अधिकारियों में से एक प्रमुख अधिकारी हेतुपूर्वक उजाड़ रखे गए मेरे भाग पर नियुक्त किया गया था। वह थुलथुल, गोलमटोल, हंसोड़ परंतु बड़ा ही घुन्ना था। गोरे अधिकारियों का बेहद विश्वस्त। वह यथासंभव मुझसे बात करने का प्रयास करता। मेरे विचार से मेरे लिए उसके मन में सम्मिश्र भावना थी, भले ही वह सत्य थी


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