मैंने स्वयं पहल करके किसी का नाम नहीं पूछा। उनके संभाषण में प्रायः। आदरभाव और कम-से-कम शिष्टता तो


दिखाई देती थी। इक्का-दूक्का गोरा उद्दंड होता था। यदि इस तरह कोई आता तो वह मेरी मुद्रा भी वैसी ही पाता। आता और जाता, मैं भी उसे कुछ नहीं गिनता।

मोगलाई मैदान

प्रायः मेरे डिब्बे की खिड़कियां बंद रहती । डिब्बे के दूसरे हिस्से में, जो लोहे के सीखचों से मेरे हिस्से से अलग किया गया था, कालेपानी के सारे बंदी धमाचैकड़ी मचा रहे हैं। गरमी के दिन। अंगार बरसाती चिलचिलाती धूप, असहनीय उमस। कोई बारात भी उत्सवार्थ यात्रा कर रही होती तो भी उसे यात्रा सुखद नहीं लगती। तिसपर मैं तो कालेपानी के आजीवन कारावास के लिए जा रहा था। डिब्बे के बाहर मोगलाई मैदान आंवे की तरह तप रहे थे। भीतर उस डिब्बे में उमस की उतनी ही तीव्रता से अंग-अंग छअपटा रहा था और उस ऊष्मा की


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में प्रचार करूंगा। एक जीवन की सफलता के लिए बस यही एक कार्य समर्थ है। इस योजना के अनुसार मैं अंदमान में पच्चीस वर्ष व्यतीत करूंगा। परंतु यह एक आजन्म कारावास भुगतने के पश्चात् भी यदि मुझे छोड़ा नहीं गया तो केवल ं ं ं ं छूटेंगे या ं ं ं ंयों ही मरंेगे, यही मेरा निश्चय है। तुम चिंता मत करना अथवा इस विचार से अपना मन छोटा मत करना कि जीवन विष हो गया । वाष्पयंत्र को सक्रिय करने के लिए अपनी देह को ईंधन बनाकर यदि किसी को जलते-सुलगते रहना ही है तो


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